वक़्त, यादें और उम्मीद – अंधेरे में जलते दीयों की प्रेरणादायक हिंदी शायरी

 यह शायरी समय की उस सच्चाई को बयां करती है जहाँ हालात की धूल में कई चेहरे धुंधले पड़ जाते हैं, लेकिन जो रिश्ते और लोग रूह में बस जाएँ, उन्हें वक़्त भी जुदा नहीं कर पाता। यह रचना यादों, अपनापन और आत्मिक जुड़ाव की गहराई को बेहद सादगी और सच्चाई के साथ सामने रखती है।

शायरी का दूसरा हिस्सा उम्मीद और हौसले की मिसाल है। जब अंधेरा घना हो और रास्ते मुश्किल लगें, तब भी दीये जलने की ताक़त रखते हैं — क्योंकि असली रोशनी संघर्ष से ही जन्म लेती है। यह शायरी टूटते हौसलों को सहारा देती है और यह याद दिलाती है कि मुश्किल हालात ही इंसान की असली मजबूती को उजागर करते हैं।

यह रचना उन लोगों के लिए है जो जीवन के संघर्ष, रिश्तों की सच्चाई और उम्मीद की रोशनी को महसूस करते हैं। यह शायरी पढ़ने वाले को भरोसा देती है कि अंधेरा चाहे जितना गहरा हो, रोशनी की एक लौ हमेशा रास्ता दिखाती है।

"वक़्त की गर्द में चेहरे खो जाते हैं अक्सर,
पर जो रूह में बसे हों, वो कहाँ जुदा होते हैं।
आज अंधेरा घना है तो क्या हुआ ऐ दोस्त,
दीये अक्सर मुश्किल हवाओं में ही जला करते हैं।"

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