सच्ची दोस्ती: दिखावे की दुनिया में वफ़ादारी का एक आखिरी ठिकाना
मानव जीवन के सफर में कई रिश्ते हमें विरासत में मिलते हैं, लेकिन 'दोस्ती' एकमात्र ऐसा रिश्ता है जिसे हम खुद चुनते हैं। यह चुनाव ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। आज के डिजिटल युग में जहाँ हमारे पास हजारों 'फेसबुक फ्रेंड्स' और 'इंस्टाग्राम फॉलोअर्स' हैं, वहाँ अक्सर हम एक सच्चे दोस्त की कमी महसूस करते हैं। सच्ची दोस्ती वह नहीं जो केवल आपकी सफलता में आपके साथ खड़ी हो, बल्कि वह है जो आपके सबसे बुरे वक्त में आपके लिए ढाल बनकर खड़ी रहे।
दोस्ती का आधार भरोसा और बिना शर्त स्वीकार्यता (Unconditional Acceptance) है। एक सच्चा दोस्त वह होता है जिसे आपको अपनी सफाई देने की जरूरत नहीं पड़ती। वह आपकी चुप्पी को पढ़ लेता है और आपके अनकहे शब्दों को सुन लेता है। बचपन की वह बेपरवाह दोस्ती, जहाँ एक साइकिल पर तीन लोग सवारी करते थे और एक समोसे के चार हिस्से होते थे, आज के 'कॉर्पोरेट डिनर्स' से कहीं ज्यादा सुकून देने वाली थी। जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमें अहसास होता है कि दोस्तों की गिनती मायने नहीं रखती, बल्कि उनकी वफ़ादारी मायने रखती है।
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो एक अच्छी दोस्ती हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी कि हवा और पानी। जब हम तनाव में होते हैं, तो एक दोस्त के साथ की गई चंद मिनटों की बातचीत वह जादू कर देती है जो महंगी दवाइयां नहीं कर पातीं। दोस्ती में 'हक' होता है—एक-दूसरे को डांटने का, सही रास्ता दिखाने का और गलती करने पर कान खींचने का। जो दोस्त आपकी गलती पर आपको टोकता नहीं, शायद वह आपका शुभचिंतक नहीं है। क्योंकि सच्ची दोस्ती का मतलब चापलूसी करना नहीं, बल्कि आइना दिखाना है।
आजकल 'फेयर-वेदर फ्रेंड्स' यानी सुख के साथियों की बाढ़ आई हुई है। जब आपके पास संसाधन होते हैं, तो महफिल सजी रहती है, लेकिन जैसे ही बादल छाते हैं, ये साथी ओझल हो जाते हैं। ऐसे में उस एक दोस्त की कद्र करना सीखें जो उस अंधेरे में मोमबत्ती लेकर आपके पास आता है। दोस्ती का रिश्ता जात-पात, अमीरी-गरीबी और सरहदों से परे होता है। कृष्ण और सुदामा की दोस्ती आज भी हमें यही सिखाती है कि हृदय का जुड़ाव भौतिक सुखों से कहीं ऊपर है।
दोस्ती को सींचने के लिए समय और संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है। आज की व्यस्त जीवनशैली में हम अक्सर अपने पुराने दोस्तों को 'कॉल' करना भूल जाते हैं। लेकिन याद रखिये, पुराने दोस्त आपकी जड़ों की तरह होते हैं—वे भले ही रोज दिखाई न दें, लेकिन आपको जमीन से जोड़े रखते हैं। यदि आपके पास एक भी ऐसा दोस्त है जिससे आप रात के 2 बजे बिना झिझक फोन कर बात कर सकते हैं, तो आप इस दुनिया के सबसे खुशकिस्मत इंसानों में से एक हैं।
अंत में, दोस्ती केवल एक शब्द नहीं, एक जिम्मेदारी है। यह जिम्मेदारी है एक-दूसरे के सपनों को पंख देने की, गिरे हुए को उठाने की और दुनिया के सामने एक-दूसरे की ढाल बनने की। इसी खूबसूरत, निस्वार्थ और अटूट वफ़ादारी को समर्पित है यह आज की ट्रेंडिंग शायरी:
"दिखावे की इस बस्ती में असल यार हूँ मैं,
तेरी हर मुसीबत में खड़ा पहरेदार हूँ मैं।
दुनिया भले ही पीठ फेर ले तेरी मुश्किल में,
तेरी हार में भी तेरा सबसे बड़ा हथियार हूँ मैं।"