बातें तो बहुत हैं...

यह शायरी उस खामोश मोहब्बत की बात करती है, जो शब्दों की मोहताज नहीं होती। जहाँ बहुत कुछ कहे बिना भी समझ लिया जाता है, और बिखरे हुए लफ़्ज़ भी किसी पूरी कहानी की तरह जुड़ जाते हैं। जब सामने वाला आपकी चुप्पी सुन सके, आपके अधूरे जज़्बातों को महसूस कर सके—वहीं से सच्चा रिश्ता शुरू होता है।

इस शायरी में मोहब्बत को दिखावे से अलग रखा गया है। यहाँ प्यार का मतलब दुनिया को बताना या साबित करना नहीं, बल्कि वो सुकून है जो किसी की मौजूदगी से दिल में उतर जाता है। बंद आँखों में भी अगर चैन मिल जाए, तो वही असली मोहब्बत है—शांत, गहरी और भरोसे से भरी हुई।

ये शायरी उन लोगों के लिए है जो emotional love, deep understanding और silent bonding पर यकीन रखते हैं। जहाँ प्यार शोर नहीं करता, बल्कि धीरे-धीरे दिल में जगह बना लेता है। अगर आपने भी कभी ऐसे रिश्ते को महसूस किया है, जहाँ खामोशी सबसे खूबसूरत भाषा बन गई हो, तो ये शब्द आपके दिल से ज़रूर जुड़ेंगे।

"बातें तो बहुत हैं, पर तुम खामोशी भी सुन लेते हो,
मेरे बिखरे हुए लफ़्ज़ों से भी कहानी बुन लेते हो।
मोहब्बत वो नहीं जो दुनिया को दिखाई जाए,
मोहब्बत वो है जो बंद आँखों में भी सुकून बन के आए।"


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