पिता की थकान का कोई शोर नहीं होता,वो चुपचाप अपने सपने गिरवी रख देता है।हमारी एक मुस्कान के लिए,वो रोज़ खुद से हार जाता है।
पिता की थकान का कोई शोर नहीं होता,वो चुपचाप अपने सपने गिरवी रख देता है।हमारी एक मुस्कान के लिए,वो रोज़ खुद से हार जाता है।
पिता की थकान का कोई शोर नहीं होता,वो चुपचाप अपने सपने गिरवी रख देता है।हमारी एक मुस्कान के लिए,वो रोज़ खुद से हार जाता है।