माँ कुछ कहती नहीं,पर उसकी खामोशी में भी दुआएँ बोलती हैं।हम जीत जाएँ या हार जाएँ,उसकी आँखें हमेशा हम पर रोती हैं।
माँ कुछ कहती नहीं,पर उसकी खामोशी में भी दुआएँ बोलती हैं।हम जीत जाएँ या हार जाएँ,उसकी आँखें हमेशा हम पर रोती हैं।
माँ कुछ कहती नहीं,पर उसकी खामोशी में भी दुआएँ बोलती हैं।हम जीत जाएँ या हार जाएँ,उसकी आँखें हमेशा हम पर रोती हैं।