सुलझा हुआ सा समझते हैं मुझको लोग,उलझा हुआ सा हूँ मैं तेरी आँखों के जाल में।लफ्ज़ कम पड़ जाते हैं तेरी तारीफ में। सुलझा हुआ सा समझते हैं मुझको लोग,उलझा हुआ सा हूँ मैं तेरी आँखों के जाल में।लफ्ज़ कम पड़ जाते हैं तेरी तारीफ में। #2026 Shayari #Hindi Shayari Like Copy Share