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दुष्यंत कुमार हिंदी साहित्य के आधुनिक कवि थे। वह 20 वीं शताब्दी के अग्रणी हिंदी कवियों में से एक  हैं।

दुष्यंत कुमार हिंदी ग़ज़ल ,हिंदी कविताएँ लिखने के लिए प्रसिद्ध हैं

जन्म: 1 सितंबर 1933 निधन: 30 दिसंबर 1975, भोपाल

शैली: हिंदी कविताएँ

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी
शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए

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