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मर जाती है जब कोई क़ौम कभी अपनी ज़बाँ छोड़ती है – कृष्ण बिहारी ‘नूर’

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एक दिन सब को चुकाना है अनासिर का हिसाबज़िन्दगी छोड़ भी दे मौत कहाँ छोड़ती है अपने होने का सुबूत और निशाँ छोड़ती हैरास्ता कोई […]

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कविता

हिज़्र का ज़ख्म मुहब्बत का शफ़ाख़ाना है,ऐ मेरे दिल तुझे ज़ख्मों में मुस्कुराना है- सोनिया खुरानिया